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कासा और कॉन्फ़ेडरेशन ने किया नई शिक्षा नीति का स्वागत

नई शिक्षा नीति का स्वागत

अध्यक्ष अनिल चोपड़ा ने बताई नीति की अच्छी बातें और चुनौतियाँ
जालंधर 30 जुलाई (जसविंदर सिंह आजाद)- देश में 34 वर्षों के बाद स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की नई नीति का सी.बी.एस.ई एफिलिएटेड स्कूल्ज एसोसिएशन और कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ स्कूल एंड कॉलेजिस पंजाब द्वारा खुली बाँहों से स्वागत किया गया। कॉन्फ़ेडरेशन के चेयरमैन अश्वनी सेखड़ी ने कहा कि मैं नई शिक्षा नीति के लिए प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ.कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली नौ सदस्य समिति द्वारा दी गई सिफारिश का स्वागत और सराहना करता हूं। ये सिफारिशें भारत में वर्तमान शैक्षिक मानकों के उन्नयन के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली हमारे युवाओं को शिक्षित करने के पश्चिमी साधनों और तरीकों का अनुसरण कर रही है और इस नीति के आने से उसमें बदलाव आएगा।
कासा और कॉन्फ़ेडरेशन के अध्यक्ष अनिल चोपड़ा ने कहा कि हम अपने देश की समृद्ध संस्कृति, मूल्यों और शिक्षण विधियों को भूल गए हैं। मैं वास्तव में इस नीति के उन्मुखीकरण की सराहना करता हूं कि यह हमारे प्राचीन परीक्षण और शिक्षण के विश्वसनीय तरीकों और एक ही समय में भारतीय ज्ञान प्रणालियों की सामग्री पर आधारित है। भारतीय मूल्यों जैसे अहिंसा, सेवा, स्वत्व, सत्य, निश्काम कर्म आदि को पाठ्यक्रम में शामिल करने की वास्तव में आवश्यकता है। हमारे पास ऐसे विद्वानों की समृद्ध विरासत है जिन्होंने एक आदर्श सभ्य समाज बनाने के लिए प्रचुर ज्ञान छोड़ा है। शिक्षा प्रणाली की सभी जरूरतों को छात्र की प्रगति से आंका जाता है। भारत और विदेशों में सभी मान्यता प्राप्त निकाय इस पैरामीटर में शीर्ष पर हैं और कॉलेज या विश्वविद्यालय को किसी भी ग्रेड को प्रदान करने के लिए अधिकतम अंक ले जाते हैं। वर्तमान शिक्षा प्रणाली में यह अवधारणा पूरी तरह से गायब थी, या यह केवल कक्षा 12 के अंक और ग्रेड तक सीमित थी। लेकिन छात्र की प्रगति की भावना गायब थी। शिक्षा प्रणाली में 5 + 3 + 3 + 4 की संरचना के साथ कम से कम छात्र प्रगति के लिए उचित दृष्टिकोण देगा। शिक्षक, माता-पिता और छात्र को नियमित रूप से पता चल जाएगा कि वे अपने ग्रेड या अंकों की निरंतरता में 5, 8, 12 कक्षा के बाद कहां खड़े हैं। प्रदर्शन को देखने के तुरंत बाद सुधारात्मक उपाय किया जा सकता है, फिर मार्गदर्शन और परामर्श उन छात्रों को दिया जा सकता है जिन्हें इसकी आवश्यकता है।
कासा के वाईस प्रेजिडेंट जोध राज गुप्ता, जनरल सेक्रेटरी डॉ.अनूप बोरी, जॉइंट सेक्रेटरी राजेश मेयर ने कहा कि एक और महत्वपूर्ण बिंदु जो इन सिफारिशों में उठाया गया है, उच्च शिक्षा में लचीले निकास के बारे में है। यह फिर से प्रशंसनीय है कि यह छात्रों को अपने समय और पसंद से बाहर निकलने की अनुमति देगा। उदाहरण के लिए अगर किसी भी छात्र को दो साल के डिग्री प्रोग्राम को पूरा करने के बाद अच्छी नौकरी का विकल्प मिलता है तो वह अपनी डिप्लोमा योग्यता से बाहर निकल सकता है। अन्यथा वर्तमान स्थिति में छात्र को पढाई छोड़नी हो और 10+2 योग्यता पर छोड़ दिया जाएगा। ये सिफारिशें छात्रों को सशक्त बनाती हैं और नियोक्ताओं को उनकी प्रतिभा के आधार पर छात्रों को लेने के लिए प्रोत्साहित करती हैं लेकिन उनकी योग्यता के आधार पर नहीं।
कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ पॉलिटेक्निक एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन शर्मा, कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ होटल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजन चोपड़ा, कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ नर्सिंग इंस्टीच्यूट्स के अध्यक्ष संजीव चोपड़ा, कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ डिग्री इंस्टीच्यूटस के अध्यक्ष तलविंदर सिंह राजू, कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंजीनियरिंग इंस्टीच्यूशन्स के अध्यक्ष अमित शर्मा ने कहा कि कोई शक नहीं कि ये निर्णय प्रभावी और दूरदर्शी हैं, लेकिन जैसा कि कहा जाता है कि कुछ लोगों के लिए हर अच्छे काम दूसरों के लिए चुनौती हैं। यह नई शिक्षा नीति के निर्णय पर लागू होता है। इससे प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को चुनौती कहा जा सकता है जा फिर छात्रों, सरकार और प्राइवेट कॉलेजों के लिए राहत, अपनी मनमर्जियां करती आ रही प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को अब सरकार को छात्रों, फीस की पूर्ण जानकारी, निर्धारित फीस हो जाएगी।